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नमामि देवि नर्मदे

हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक ) हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक )
18 Mar 2026
शीर्षक - नमामि देवि नर्मदे ​कल-कल करती बहती धारा, अमृत का वरदान है, रेवा तेरा पावन जल ही, जीवन की पहचान है। अमरकंटक की ऊँचाइयों से, तूने जन्म लिया है, कंकड़-कंकड़ शंकर बनकर, जग का कल्याण किया है। ​नमामि देवि नर्मदे, नमामि देवि नर्मदे। ​विंध्य-सतपुड़ा की गोदी में, तूने खेल रचाया है, भेड़ाघाट के संगमरमर पर, अनुपम रूप सजाया है। पाप विनाशिनी, कष्ट हारिणी, तेरी महिमा न्यारी, दर्शन मात्र से तर जाता है, नर हो या कोई नारी। ​नमामि देवि नर्मदे, नमामि देवि नर्मदे। ​मैया तेरी गोद में आकर, मन पावन हो जाता है, श्रद्धा का हर एक दीप, तट पर जगमगाता है। सदा प्रवाहित रहना मैया, ओ माँ सुख की खानी, युगों-युगों तक गूँजती रहे, तेरी अमर कहानी। ​नमामि देवि नर्मदे, नमामि देवि नर्मदे। 💐💐 हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक ) जयपुर राजस्थान
हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक )

हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक )

प्रकाशित: 18 Mar 2026