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श्री   श्याम   साहित्य   मंच

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नारी

हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक ) हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक )
03 Mar 2026
नारी — सृष्टि की स्वरमयी शक्ति,नारी वह ज्योति है जो अंधेरों के बीच भी दीपक बनकर जलती है, वह चुप रहकर भी संसार की हर पीड़ा को अपने आँचल में ढलती है। उसकी मुस्कान में बसता है पूरा आकाश का नीलापन, उसकी आँखों में छिपा होता है धैर्य, तपस्या और समर्पण। वह कभी माँ बनकर ममता की गंगा बहाती है, कभी बहन बनकर स्नेह की राखी जीवनभर निभाती है। कभी पत्नी बनकर जीवन की नाव को किनारा देती है, कभी बेटी बनकर घर-आँगन में फूलों-सी खुशबू लेती है। उसकी चूड़ियों की खनक में संघर्ष की कहानी होती है, उसकी चुप्पी में भी एक गहरी जुबानी होती है। वह झुकती है तो केवल प्रेम के लिए, टूटती है तो भी अपने स्वाभिमान के लिए। उसकी सहनशीलता हिमालय से ऊँची, उसका हृदय सागर से भी गहरा। वह अग्नि भी है, वह अमृत भी है, वह शक्ति भी है, वह करुणा भी है। नारी को केवल देह समझना भूल है जमाने की, वह आत्मा है इस सृष्टि की, वह पहचान है हर अफ़साने की। जब-जब दुनिया ने उसे परखा है कठिनाई की धूप में, वह सोना बनकर निखरी है हर अग्नि और रूप में। नारी केवल एक शब्द नहीं, सम्पूर्ण सृष्टि का सार है, उसके बिना यह जीवन, यह जगत, सब कुछ बेकार है। लेखक - हर्षवर्धन शर्मा
हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक )

हर्षवर्धन शर्मा ( लेखक )

प्रकाशित: 03 Mar 2026